राज्य कैबिनेट ने SpaceTech Policy-2026 को दी मंज़ूरी, अंतरिक्ष तकनीक क्षेत्र में निवेश और रोज़गार को मिलेगा बढ़ावा
राज्य सरकार ने अंतरिक्ष तकनीक के क्षेत्र में बड़ी पहल करते हुए SpaceTech Policy-2026 को कैबिनेट की मंज़ूरी दे दी है। इस नीति का मकसद सैटेलाइट मैन्युफैक्चरिंग, जियोस्पेशियल टेक्नोलॉजी और स्पेस इनोवेशन को संस्थागत समर्थन देना है। सरकार का मानना है कि इससे निवेश आएगा और उच्च-कौशल वाली नौकरियों के नए अवसर बनेंगे।
निर्णय में क्या तय किया गया है
राज्य कैबिनेट ने SpaceTech Policy-2026 को स्वीकृति दी है। नीति के तहत अंतरिक्ष तकनीक से जुड़े उद्योगों—जैसे सैटेलाइट निर्माण, जियोस्पेशियल एप्लीकेशंस और स्पेस-आधारित सेवाओं—को प्रोत्साहन दिया जाएगा।
आकलन के अनुसार, इस नीति से 8,000 से अधिक नौकरियाँ सृजित होने और करीब ₹1,000 करोड़ के निवेश के आकर्षित होने की संभावना है। इसका असर स्टार्ट-अप्स, MSMEs, रिसर्च संस्थानों और तकनीकी पेशेवरों पर पड़ेगा।
पृष्ठभूमि और नीति की जरूरत
बीते वर्षों में अंतरिक्ष तकनीक केवल सरकारी मिशनों तक सीमित नहीं रही। निजी भागीदारी, स्टार्ट-अप्स और जियोस्पेशियल डेटा के बढ़ते उपयोग ने इस सेक्टर को तेज़ी से आगे बढ़ाया है।
राज्य स्तर पर स्पष्ट नीति के अभाव में निवेश और उद्योग विकास की गति सीमित थी। SpaceTech Policy-2026 के जरिए सरकार का उद्देश्य एक ऐसा इकोसिस्टम बनाना है, जहाँ रिसर्च से लेकर मैन्युफैक्चरिंग और कमर्शियल एप्लीकेशंस तक की पूरी वैल्यू-चेन विकसित हो सके।मध्य प्रदेश में रद्द होंगे BPL कार्ड लाखों आपात्रों को हटाने के लिए लागू किया गया नया नियम
आम नागरिकों और युवाओं के लिए व्यावहारिक असर
इस नीति से इंजीनियरिंग, डेटा साइंस, GIS, एयरोस्पेस और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग से जुड़े युवाओं के लिए नए करियर विकल्प खुलेंगे।
स्टार्ट-अप्स को तकनीकी सहयोग और निवेश तक बेहतर पहुँच मिलने की उम्मीद है। आम नागरिकों के लिए इसका लाभ बेहतर मैपिंग, आपदा प्रबंधन, कृषि मॉनिटरिंग और स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर जैसी सेवाओं के रूप में सामने आ सकता है।जानिए 2026 में Youtube मोनेटाइजेशन पॉलिसी क्या है
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Source: Press Information Bureau (PIB)
Official Link: (आधिकारिक लिंक उपलब्ध होते ही अपडेट किया जाएगा)
